🪔 मां बगलामुखी चालीसा (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Print Friendly, PDF & Email
5/5 - (2 votes)

मां बगलामुखी चालीसा लिरिक्स (हिन्दी & PDF) –

॥ दोहा ॥

सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूं चालीसा आज,
कृपा करहु मोपर सदा, पूरन हो मम काज॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय श्री बगला माता |
आदिशक्ति सब जग की त्राता ॥ १ ॥

बगला सम तब आनन माता |
एहि ते भयउ नाम विख्याता ॥ २ ॥

शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी |
असतुति करहिं देव नर-नारी ॥ ३ ॥

पीतवसन तन पर तव राजै |
हाथहिं मुद्गर गदा विराजै ॥ ४ ॥

तीन नयन गल चम्पक माला |
अमित तेज प्रकटत है भाला ॥ ५ ॥

रत्न-जटित सिंहासन सोहै |
शोभा निरखि सकल जन मोहै ॥ ६ ॥

आसन पीतवर्ण महारानी |
भक्तन की तुम हो वरदानी ॥ ७ ॥

पीताभूषण पीतहिं चन्दन |
सुर नर नाग करत सब वन्दन ॥ ८ ॥

एहि विधि ध्यान हृदय में राखै |
वेद पुराण संत अस भाखै ॥ ९ ॥

अब पूजा विधि करौं प्रकाशा |
जाके किये होत दुख-नाशा ॥ १० ॥

प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै |
पीतवसन देवी पहिरावै ॥ ११ ॥

कुंकुम अक्षत मोदक बेसन |
अबिर गुलाल सुपारी चन्दन ॥ १२ ॥

माल्य हरिद्रा अरु फल पाना |
सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना ॥ १३ ॥

धूप दीप कर्पूर की बाती |
प्रेम-सहित तब करै आरती ॥ १४ ॥

अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे |
पुरवहु मातु मनोरथ मोरे ॥ १५ ॥

मातु भगति तब सब सुख खानी |
करहुं कृपा मोपर जनजानी ॥ १६ ॥

त्रिविध ताप सब दुख नशावहु |
तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु ॥ १७ ॥

बार-बार मैं बिनवहुं तोहीं |
अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं ॥ १८ ॥

पूजनांत में हवन करावै |
सा नर मनवांछित फल पावै ॥ १९ ॥

सर्षप होम करै जो कोई |
ताके वश सचराचर होई ॥ २० ॥

तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै |
भक्ति प्रेम से हवन करावै ॥ २१ ॥

दुख दरिद्र व्यापै नहिं सोई |
निश्चय सुख-सम्पत्ति सब होई ॥ २२ ॥

फूल अशोक हवन जो करई |
ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई ॥ २३ ॥

फल सेमर का होम करीजै |
निश्चय वाको रिपु सब छीजै ॥ २४ ॥

गुग्गुल घृत होमै जो कोई |
तेहि के वश में राजा होई ॥ २५ ॥

गुग्गुल तिल संग होम करावै |
ताको सकल बंध कट जावै ॥ २६ ॥

बीलाक्षर का पाठ जो करहीं |
बीज मंत्र तुम्हरो उच्चरहीं ॥ २७ ॥

एक मास निशि जो कर जापा |
तेहि कर मिटत सकल संतापा ॥ २८ ॥

घर की शुद्ध भूमि जहं होई |
साध्का जाप करै तहं सोई ॥ २९ ॥

सोइ इच्छित फल निश्चय पावै |
यामै नहिं कदु संशय लावै ॥ ३० ॥

अथवा तीर नदी के जाई |
साधक जाप करै मन लाई ॥ ३१ ॥

दस सहस्र जप करै जो कोई |
सक काज तेहि कर सिधि होई ॥ ३२ ॥

जाप करै जो लक्षहिं बारा |
ताकर होय सुयश विस्तारा ॥ ३३ ॥

जो तव नाम जपै मन लाई |
अल्पकाल महं रिपुहिं नसाई ॥ ३४ ॥

सप्तरात्रि जो पापहिं नामा |
वाको पूरन हो सब कामा ॥ ३५ ॥

नव दिन जाप करे जो कोई |
व्याधि रहित ताकर तन होई ॥ ३६ ॥

ध्यान करै जो बन्ध्या नारी |
पावै पुत्रादिक फल चारी ॥ ३७ ॥

प्रातः सायं अरु मध्याना |
धरे ध्यान होवै कल्याना ॥ ३८ ॥

कहं लगि महिमा कहौं तिहारी |
नाम सदा शुभ मंगलकारी ॥ ३९ ॥

पाठ करै जो नित्या चालीसा ॥
तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा ॥ ४० ॥

॥ दोहा ॥

सन्तशरण को तनय हूं, कुलपति मिश्र सुनाम |
हरिद्वार मण्डल बसूं, धाम हरिपुर ग्राम॥

उन्नीस सौ पिचानबे सन् की, श्रावण शुक्ला मास |
चालीसा रचना कियौ, तव चरणन को दास ॥

🪔 मां बगलामुखी चालीसा (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Baglamukhi Chalisa (English Lyrics & PDF) –

|| Doha ||

Sir nawai bagalamukhi, likhoon chalisa aaj,
kripa karahu mopor sada, poorn ho mam kaaj॥

|| Chaupai ||

Jai jai jai Shri Bagla Mata |
Adishakti sab jag ki traata ॥ 1 ॥

Bagla sam tab aanan mata |
Ehi te bhayu naam vikhyata ॥ 2 ॥

Shashi lalat kundal chhavi nyaari |
Asatuti karahin dev nar-naari ॥ 3 ॥

Peetvasan tan par tav raajai |
Haathhin mudgar gada virajai ॥ 4 ॥

Teen nayan gal champak maala |
Amit tej prakatat hai bhaala ॥ 5 ॥

Ratn-jatit sinhaasan sohai |
Shobha nirakhi sakal jan mohai ॥ 6 ॥

Aasan peetvarn maharani |
Bhaktan ki tum ho varadaani ॥ 7 ॥

Peetabhushan peetahin chandan |
Sur nar naag karat sab vandan ॥ 8 ॥

Ehi vidhi dhyaan hriday mein raakhai |
Ved Puran sant as bhakhai ॥ 9 ॥

Ab puja vidhi karun prakasha |
Jaake kiye hot dukh-nasha ॥ 10 ॥

Prathamhin peet dhvaja fahraavai |
Peetvasan devi pahiravai ॥ 11 ॥

Kunkum akshat modak besan |
Abir gulal supari chandan ॥ 12 ॥

Maalya hirdra aru phal paana |
Sabhin chadhai dharai ur dhyaana ॥ 13 ॥

Dhoop deep karpoor ki baati |
Prem-sahit tab karai aarti ॥ 14 ॥

Astuti karai haath dou jore |
Puravahu matu manorath more ॥ 15 ॥

Matu bhagati tab sab sukh khani |
Karahun kripa mopor janjaani ॥ 16 ॥

Trividh taap sab dukh nashaavahu |
Timir mitaakar gyan badhaavahu ॥ 17 ॥

Baar-baar main binavahun tohi |
Aviral bhakti gyan do mohi ॥ 18 ॥

Pujanaant mein haven karaavai |
Sa nar manvaanchhit phal paavai ॥ 19 ॥

Sarshap hom karai jo koi |
Taake vash sacharaachar hoi ॥ 20 ॥

Til tandul sang ksheer miraavai |
Bhakti prem se haven karaavai ॥ 21 ॥

Dukh daridra vyapai nahin soi |
Nishchay sukh-sampatti sab hoi ॥ 22

Phool ashok haven jo karaai |
Taake grih sukh-sampatti bharai ॥ 23 ॥

Phal semar ka hom karijai |
Nishchay vaako ripu sab chhijai ॥ 24 ॥

Guggul ghrut homai jo koi |
Te hi ke vash mein raja hoi ॥ 25 ॥

Guggul til sang hom karaavai |
Taako sakal bandh kat jaavai ॥ 26 ॥

Bilakshar ka paath jo karahi |
Beej mantra tumharo uchcharahi ॥ 27 ॥

Ek maas nishi jo kar jaapa |
Te kar mitat sakal santaapa ॥ 28 ॥

Ghar ki shuddh bhoomi jaham hoi |
Sadka jaap karai taham soi ॥ 29 ॥

Soi ichchhit phal nishchay paavai |
Yaamai nahin kadu sanshay laavai ॥ 30 ॥

Athva teer nadi ke jai |
Sadak jap karai man laai || 31 ||

Das sahasr jap karai jo koi |
Sak kaaj tehi kar siddhi hoi || 32 ||

Jap karai jo lakshahin baara |
Takar hoy suyash vistara || 33 ||

Jo tav naam japai man laai |
Alpakal mahan ripuhin nasai || 34 ||

Saptaratri jo paaphin naama |
Vako pooran ho sab kaama || 35 ||

Nav din jap kare jo koi |
Vyaadhi rahit takar tan hoi || 36 ||

Dhyan karai jo bandhya naari |
Pavai putraadik phal chaari || 37 ||

Pratah saayan aru madhyana |
Dharae dhyaan hovai kalyana || 38 ||

Kahan lagi mahima kahau tihari |
Naam sadaa shubh mangalkaari || 39 ||

Paath karai jo nitya chalisa ||
Tehi par kripa karahin Gaurisha || 40 ||

|| Doha ||

Santasharan ko tanay hoon, kulpati Mishra sunaam |
Haridwar mandal basoon, dhaam Haripur gram ||

Unnis sau pichaanbe san ki, Shravan shukla maas |
Chalisa rachna kiyo, tav charnan ko daas ||

चालीसा संग्रह – link

आरती संग्रह – लिंक

स्त्रोत संग्रह – लिंक

Sharing Is Caring:

Leave a Comment