🪔 गंगा चालीसा (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

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गंगा चालीसा लिरिक्स (हिन्दी & PDF) –

॥दोहा॥
जय जय जय जग पावनी,
जयति देवसरि गंग ।
जय शिव जटा निवासिनी,
अनुपम तुंग तरंग ॥

॥चौपाई॥
जय जय जननी हराना अघखानी ।
आनंद करनी गंगा महारानी ॥

जय भगीरथी सुरसरि माता ।
कलिमल मूल डालिनी विख्याता ॥

जय जय जहानु सुता अघ हनानी ।
भीष्म की माता जगा जननी ॥

धवल कमल दल मम तनु सजे ।
लखी शत शरद चंद्र छवि लजाई ॥ ४ ॥

वहां मकर विमल शुची सोहें ।
अमिया कलश कर लखी मन मोहें ॥

जदिता रत्ना कंचन आभूषण ।
हिय मणि हर, हरानितम दूषण ॥

जग पावनी त्रय ताप नासवनी ।
तरल तरंग तुंग मन भावनी ॥

जो गणपति अति पूज्य प्रधान ।
इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना ॥ ८ ॥

ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी ।
श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि ॥

साथी सहस्त्र सागर सुत तरयो ।
गंगा सागर तीरथ धरयो ॥

अगम तरंग उठ्यो मन भवन ।
लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन ॥

तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता ।
धरयो मातु पुनि काशी करवत ॥ १२ ॥

धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी ।
तरनी अमिता पितु पड़ पिरही ॥

भागीरथी ताप कियो उपारा ।
दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा ॥

जब जग जननी चल्यो हहराई ।
शम्भु जाता महं रह्यो समाई ॥

वर्षा पर्यंत गंगा महारानी ।
रहीं शम्भू के जाता भुलानी ॥ १६ ॥

पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो ।
तब इक बूंद जटा से पायो ॥

ताते मातु भें त्रय धारा ।
मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा ॥

गईं पाताल प्रभावती नामा ।
मन्दाकिनी गई गगन ललामा ॥

मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी ।
कलिमल हरनी अगम जग पावनि ॥ २० ॥

धनि मइया तब महिमा भारी ।
धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी ॥

मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी ।
धनि सुर सरित सकल भयनासिनी ॥

पन करत निर्मल गंगा जल ।
पावत मन इच्छित अनंत फल ॥

पुरव जन्म पुण्य जब जागत ।
तबहीं ध्यान गंगा महं लागत ॥ २४ ॥

जई पगु सुरसरी हेतु उठावही ।
तई जगि अश्वमेघ फल पावहि ॥

महा पतित जिन कहू न तारे ।
तिन तारे इक नाम तिहारे ॥

शत योजन हूं से जो ध्यावहिं ।
निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं ॥

नाम भजत अगणित अघ नाशै ।
विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे ॥ २८ ॥

जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना ।
धर्मं मूल गंगाजल पाना ॥

तब गुन गुणन करत दुख भाजत ।
गृह गृह सम्पति सुमति विराजत ॥

गंगहि नेम सहित नित ध्यावत ।
दुर्जनहूं सज्जन पद पावत ॥

उद्दिहिन विद्या बल पावै ।
रोगी रोग मुक्त हवे जावै ॥ ३२ ॥

गंगा गंगा जो नर कहहीं ।
भूखा नंगा कभुहुह न रहहि ॥

निकसत ही मुख गंगा माई ।
श्रवण दाबी यम चलहिं पराई ॥

महं अघिन अधमन कहं तारे ।
भए नरका के बंद किवारें ॥

जो नर जपी गंग शत नामा ।
सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा ॥ ३६ ॥

सब सुख भोग परम पद पावहीं ।
आवागमन रहित ह्वै जावहीं ॥

धनि मइया सुरसरि सुख दैनि ।
धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी ॥

ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा ।
सुन्दरदास गंगा कर दासा ॥

जो यह पढ़े गंगा चालीसा ।
मिली भक्ति अविरल वागीसा ॥ ४० ॥

॥ दोहा ॥
नित नए सुख सम्पति लहैं, धरें गंगा का ध्यान ।
अंत समाई सुर पुर बसल, सदर बैठी विमान ॥

संवत भुत नभ्दिशी, राम जन्म दिन चैत्र ।
पूरण चालीसा किया, हरी भक्तन हित नेत्र ॥

🪔 गंगा चालीसा (हिंदी) & (English Lyrics) PDF

Ganga Chalisa (English Lyrics & PDF) –

॥ Doha ॥


Jai Jai Jai Jag Pavni, Jayati Devsari Gang ।
Jai Shiv Jata Nivasini, Anupam Tung Tarang ॥


॥ Chaupai ॥


Jai Jai Janani Harana Aghakhani ।
Anand Karani Ganga Maharani ॥

Jai Bhagirathi Surasari Mata ।
Kalimal Mool Dalini Vikhyata ॥

Jai Jai Jahanu Suta Agh Hanani ।
Bhishm Ki Mata Jaga Janani ॥

Dhaval Kamal Dal Mam Tanu Saje ।
Lakhi Shat Sharad Chandr Chhavi Lajai ॥ 4 ॥

Wahan Makar Vimal Shuchi Sohen ।
Amiya Kalash Kar Lakhi Man Mohen ॥

Jadita Ratna Kanchan Abhushan ।
Hiya Mani Har, Haranitam Dushan ॥

Jag Pavani Tray Tap Nasavani ।
Taral Tarang Tung Man Bhavani ॥

Jo Ganapati Ati Poojy Pradhan ।
Ihoon Te Pratham Ganga Asnana ॥ 8 ॥

Brahma Kamandal Vasini Devi ।
Shri Prabhu Pad Pankaj Sukh Sevi ॥

Sathi Sahastr Sagar Sut Tarayo ।
Ganga Sagar Tirath Dharayo ॥

Agam Tarang Uthyo Man Bhavan ।
Lakhi Tirath Haridvar Suhavan ॥

Tirath Raj Prayag Akshaiveta ।
Dharayo Matu Puni Kashi Karavat ॥ 12 ॥

Dhani Dhani Surasari Svarg Ki Sidhi ।
Tarani Amita Pitu Pad Pirahi ॥

Bhagirathi Tap Kiyo Upara ।
Diyo Brahm Tav Surasari Dhara ॥

Jab Jag Janani Chalyo Haharai ।
Shambhu Jata Mahan Rahyo Samai ॥

Varsha Paryant Ganga Maharani ।
Rahin Shambhoo Ke Jata Bhulani ॥ 16 ॥

Puni Bhagirathi Shambhuhin Dhyayo ।
Tab Ik Boond Jata Se Payo ॥

Tate Matu Bhen Traya Dhara Mrityu Lok,
Nabha, Aru Patara ॥

Gain Patal Prabhavati Nama ।
Mandakini Gai Gagan Lalama ॥

Mrtyu Lok Jahnavi Suhavani ।
Kalimal Harani Agam Jag Pavani ॥ 20 ॥

Dhani Maiya Tab Mahima Bhari ।
Dharman Dhuri Kali Kalush Kuthari ॥

Matu Prabhavati Dhani Mandakini ।
Dhani Sur Sarit Sakal Bhayanasini ॥

Pan Karat Nirmal Ganga Jal ।
Pavat Man Ichchhit Anant Phal ॥

Purav Janm Puny Jab Jagat ।
Tabahin Dhyan Ganga Mahan Lagat ॥ 24 ॥

Jai Pagu Surasari Hetu Uthavahi ।
Tai Jagi Ashvamegh Phal Pavahi ॥

Maha Patit Jin Kahoo Na Tare ।
Tin Tare Ik Naam Tihare ॥

Shat Yojan Hoon Se Jo Dhyavahin ।
Nishachai Vishnu Lok Pad Pavahin ॥

Nam Bhajat Aganit Agh Nashai ।
Vimal Gyan Bal Buddhi Prakashe ॥ 28 ॥

Jimi Dhan Mool Dharman Aru Dana ।
Dharman Mool Gangajal Pana ॥

Tab Gun Gunan Karat Dukh Bhajat ।
Grh Grh Sampati Sumati Virajat ॥

Gangahi Nem Sahit Nit Dhyavat ।
Durjanahoon Sajjan Pad Pavat ॥

Uddihin Vidya Bal Pavai ।
Rogi Rog Mukt Have Javai ॥ 32 ॥

Ganga Ganga Jo Nar Kahahin ।
Bhookha Nanga Kabhuhuh Na Rahahi ॥

Nikasat Hi Mukh Ganga Mai ।
Shravan Dabi Yam Chalahin Parai ॥

Mahan Aghin Adhaman Kahan Tare ।
Bhe Naraka Ke Band Kivaren ॥

Jo Nar Japi Gang Shat Nama ।
Sakal Siddhi Pooran Hvai Kama ॥ 36 ॥

Sab Sukh Bhog Param Pad Pavahin ।
Avagaman Rahit Hvai Javahin ॥

Dhani Maiya Surasari Sukh Daini ।
Dhani Dhani Tirath Raj Triveni ॥

Kakara Gram Rshi Durvasa ।
Sundaradas Ganga Kar Dasa ॥

Jo Yah Padhe Ganga Chalisa ।
Mili Bhakti Aviral Vagisa ॥ 40 ॥

॥ Doha ॥
Nit Nae Sukh Sampati Lahain. Dharen Ganga Ka Dhyan ।
Ant Samai Sur Pur Basal. Sadar Baithi Viman ॥
Sanvat Bhut Nabhdishi. Ram Janm Din Chaitra ।
Pooran Chalisa Kiya. Hari Bhaktan Hit Netra ॥

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आरती संग्रह – लिंक

स्त्रोत संग्रह – लिंक

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